एशियन गेम्स 2026 में महिला बॉक्सिंग में परवीन हुड्डा ने कमाल प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया.
भारत की महिला बॉक्सर परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में कमाल कर दिखाया है. हरियाणा के रोहतक की रहने वाली इस बॉक्सर ने 65 किलो वर्ग के फाइनल मैच में ताईवान की बॉक्सर को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. परवीन ने खिताबी भिड़ंत में ताइपे की बॉक्सर को 3-2 से मात दी. इस रोमांचक मुकाबले में पहले राउंड में परवीन ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन दूसरे राउंड में ताइपे की बॉक्सर ने वापसी की. हालांकि परवीन ने धैर्य ना खोते हुए तीसरे राउंड में मुक्कों की बौछार करते हुए गोल्ड अपने नाम कर लिया. परवीन हुड्डा के लिए ये गोल्ड काफी मायने रखता है क्योंकि पिछले एशियन गेम्स में इस खिलाड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था लेकिन परवीन से ये मेडल छीन लिया गया था.
परवीन ने बुरे वक्त से की वापसी
परवीन हुड्डा का एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड जीतना किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. हुड्डा से साल 2023-24 में कांस्य पदक छीन लिया गया था. दरअसल उन्होंने डोपिंग टेस्ट के लिए अपनी लोकेशन नहीं बताई, जिसकी वजह से उनपर 22 महीने का बैन लगा. साथ ही उनका ओलंपिक कोटा भी वापस ले लिया गया था. इस घटना के बाद परवीन सदमे में चली गई थीं. वो मानसिक रूप से टूट गई थीं लेकिन मनोवैज्ञानिक की मदद और मेडिटेशन, मेहनत के दम पर उन्होंने वापसी की और अब इस खिलाड़ी ने एशियन गेम्स में ही गोल्ड मेडल जीत लिया है.
परवीन का संघर्ष
परवीन हुड्डा बेहद ही गरीब परिवार से आती हैं. खेती की जमीन बंजर थी जिसकी वजह से परिवार आर्थिक तौर पर कमजोर था. परिवार इतना गरीब था कि परवीन हुड्डा को बॉक्सिंग के दस्ताने तक नहीं दिला पाए. 2011 में गांव के सरपंच सुधीर हुड्डा ने बॉक्सिंग एकेडमी शुरू की और परवीन ने मैरी कॉम और विजेंदर सिंह से प्रेरित होकर बॉक्सिंग शुरू की. परवीन को कोच ने ही दस्ताने और जूते दिए. पिता शुरुआत में बॉक्सिंग के विरोधी थे लेकिन मां ने हमेशा परवीन का समर्थन किया और आज देखिए हिंदुस्तान की बेटी ने कैसे देश का नाम रोशन किया.