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एक्टर Dino Morea के गिरफ्तार होने की खबर:मीठी नदी डीसिल्टिंग घोटाले से जुड़ा है मामला

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एक्टर डीनो मोरिया शुक्रवार को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार होने की खबर सामने आई है।

शुक्रवार सुबह वे कमिश्नर ऑफिस पहुंचे, जहां मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के सामने उनकी पेशी हुई।
मामला मीठी नदी डीसिल्टिंग स्कैम का है। दावा है कि राज्य में नदियों की सफाई के नाम पर हुए 65 करोड़ रुपए का गबन हुआ।
इस जांच में मोरिया का नाम इसलिए आया क्योंकि उन पर उन कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े होने का आरोप है।
इन लोगों पर मुंबई में बाढ़ से बचाव और ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव के लिए दिए गए सरकारी फंड में हेराफेरी करने का शक है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डीनो, दिशा सालियन की मौत के मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं।
डीनो मोरिया ने ‘राज, ‘अक्सर’ और ‘गुनाह’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है।
डीनो मोरिया ने ‘राज, ‘अक्सर’ और ‘गुनाह’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है।
पिछले साल ED ने डीनो के घर छापा मारा था
2025 में भी ED ने मुंबई और कोच्चि में 15 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें मोरिया का घर भी शामिल था। इन छापों में उन लोगों और संगठनों को निशाना बनाया गया जो जांच के दायरे में आए कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी केतन कदम और जय जोशी ने मैटप्रॉप कंपनी के अधिकारियों और बीएमसी के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके घोटाला किया।
जब घोटाले के मुख्य आरोपी केतन कदम के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच हुई तो इसमें एक्टर डिनो मोरिया और उनके भाई का नाम सामने आया। दोनों ने कई मौकों पर केतन कदम से बात की थी।
जांच अधिकारियों का मानना है कि डीनो मोरिया और केतन महज दोस्त नहीं हैं, बल्कि उनके बीच पैसों का लेन-देन भी हो सकता है। यही वजह है कि डिनो को जांच के दायरे में लेकर पूछताछ की जा रही है।
साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘राज’ में बिपाशा बसु ने संजना और डीनो मोरिया ने आदित्य धनराज का किरदार निभाया था।
क्या था मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट
मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) और अन्य सिविक एजेंसियों ने की थी।
इस प्रोजेक्ट का मकसद मलबे को हटाकर और नदी के तल का रखरखाव करके बाढ़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाना था।
बाद की जांच में डीसिल्टिंग के बताए गए काम और असल में किए गए काम के बीच अंतर मिला, जिससे प्रोजेक्ट के फंड के इस्तेमाल पर शक पैदा हुआ।
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