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Ludhiana पहुंचे Dhirendra Shastri का स्वागत:लोगों ने फूलों की वर्षा की, आज से शुरू होगी हनुमंत कथा; ट्रैफिक पुलिस ने जारी किया रूट प्लान

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बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार देर रात लुधियाना पहुंचे।

भक्तों ने फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री पहली बार हनुमंत कथा सुनाएंगे। मंगलम वेलफेयर एंड चैरिटेबल सोसायटी की ओर से शनिवार से 30 सितंबर तक 5 दिवसीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन रखा गया है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और हरियाणा के सीएम नायब सैनी भी आज कथा में शिरकत करेंगे। सीएम सैनी सवा 5 बजे लुधियाना पहुंचेंगे और देर शाम 7 बजे हलवारा एयरपोर्ट से वापस जाएंगे। कथा का आयोजन चंडीगढ़ रोड स्थित वर्धमान मिल्स के सामने GLADA ग्राउंड में किया जा रहा है।
ट्रैफिक पुलिस ने डायवर्ट प्लान जारी किया है। एक लाख स्क्वायर फीट में पंडाल सजाया जा रहा है। करीब 70 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री कैलाश नगर में ठहरे हैं। कथा स्थल से करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर उनका ठहराव रखा गया है।
हनुमान भक्ति और श्रीराम कथा के प्रसंग होंगे समिति के अध्यक्ष वरिंदर सहगल ने बताया कि लुधियाना में पहली बार पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को हनुमान भक्ति के साथ भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार, पांच दिनों तक चलने वाली कथा में भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना, श्रीराम कथा के प्रसंग, धार्मिक अनुष्ठान और भव्य दरबार आयोजित किए जाएंगे। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध करवाने के साथ सनातन संस्कृति से जोड़ना बताया गया है।
ट्रैफिक पुलिस ने जारी किया रूट मैप।
ट्रैफिक पुलिस ने जारी किया रूट मैप।
पंजाब के अलग-अलग जिलों से पहुंचेंगे श्रद्धालु आयोजकों का कहना है कि कथा में केवल लुधियाना ही नहीं, बल्कि पंजाब के अलग-अलग जिलों और आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के आने को देखते हुए आयोजन स्थल पर बैठने, पेयजल, चिकित्सा सहायता, पार्किंग, सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए अलग-अलग समितियां बनाई जा रही हैं। स्वयंसेवकों को भी विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, ताकि कथा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
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