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Ludhiana के बुड्ढा दरिया को प्रदूषण से बचाने की तैयारी, डेयरी मालिकों ने मानी प्रशासन की बात

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लुधियाना में बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार और प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर गठित 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी की पहली बैठक जमालपुर स्थित 225 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में आयोजित की गई। राज्यसभा सांसद और कमेटी के चेयरमैन संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में डेयरी मालिकों ने दरिया को प्रदूषण से बचाने के लिए पूरा सहयोग देने पर सहमति जताई।
बैठक में फैसला लिया गया कि डेयरियों से निकलने वाला गोबर और पशुओं का मूत्र बुड्ढा दरिया में नहीं जाने दिया जाएगा। इसके साथ ही डेयरी संचालक साफ पानी की खपत कम करेंगे और पानी का इस्तेमाल पशुओं की जरूरत के अनुसार ही करेंगे।
डेयरी मालिक गोबर उठवाने की जिम्मेदारी निभाएंगे
कमेटी की बैठक में डेयरी संचालकों ने भरोसा दिया कि सभी डेयरियों से गोबर ठेकेदार के माध्यम से उठवाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम की ओर से पहले ही तीन साल का ठेका दिया गया है।
बैठक में स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और कमेटी के उपाध्यक्ष घनश्याम थोरी भी मौजूद रहे। इस दौरान डेयरी मालिकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। संत सीचेवाल ने आश्वासन दिया कि जिन डेयरी संचालकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
ईटीपी प्लांटों में क्षमता से दोगुना पहुंच रहा पानी
बैठक के बाद कमेटी के सदस्यों ने ताजपुर रोड स्थित डेयरी कॉम्प्लेक्स का दौरा किया और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए इंतजामों का निरीक्षण किया।
घनश्याम थोरी ने बताया कि ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में ईटीपी प्लांट की क्षमता 2.25 एमएलडी है, जबकि हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के प्लांट की क्षमता 3.75 एमएलडी है। दोनों प्लांटों की कुल क्षमता 6 एमएलडी है, लेकिन इनमें प्रतिदिन लगभग 12 एमएलडी पानी पहुंच रहा है।
इससे ट्रीटमेंट प्लांटों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पानी के उचित उपचार में चुनौती पैदा हो रही है।
पानी की बर्बादी रोकने के लिए लगाए जाएंगे फ्लो मीटर
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि जरूरत से ज्यादा पानी की आपूर्ति और उसका इस्तेमाल एक बड़ी समस्या है। इसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि डेयरियों में फ्लो मीटर लगाने का उद्देश्य प्रत्येक डेयरी में इस्तेमाल होने वाले पानी की वास्तविक मात्रा का पता लगाना है। इससे पानी की खपत पर निगरानी रखी जा सकेगी और अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने में मदद मिलेगी।
ताजपुर रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स के प्रधान सतविंदर सिंह और हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के प्रधान कुलदीप सिंह ने भी बैठक में अपना पक्ष रखा। इसके बाद दोनों ने सहमति जताई कि सभी डेयरी मालिक गोबर ठेकेदार से उठवाएंगे और पीने योग्य साफ पानी की बर्बादी नहीं करेंगे। पशुओं की जरूरत के मुताबिक ही पानी इस्तेमाल किया जाएगा।
दो साल से चल रही मुहिम, अब तक हो चुकी हैं 46 बैठकें
संत सीचेवाल ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस दिशा में अब तक 46 बैठकें की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया भी लुधियाना आकर इस मुद्दे पर सात बार बैठक कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में भी दो उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
अगले सप्ताह फिर होगी कमेटी की बैठक
इस बैठक में नगर निगम कमिश्नर डॉ. अंकुर महेंद्रू, एडीसी (यूडी) अमित बंबी, डीसीपी आलम विजय सिंह, संयुक्त कमिश्नर अमनप्रीत सिंह और तपन भनोट, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य इंजीनियर आर.के. रत्तड़ा सहित कई अधिकारी और डेयरी कॉम्प्लेक्सों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में तय किया गया कि इस अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए अगले सप्ताह फिर से बैठक की जाएगी।
अंत में संत सीचेवाल और घनश्याम थोरी ने डेयरी मालिकों, उद्योगपतियों और आम लोगों से अपील की कि वे बुड्ढा दरिया में कूड़ा-कचरा और गंदगी न डालें। उन्होंने कहा कि दरिया को साफ रखने के लिए प्रशासन के साथ-साथ हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
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