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Pargat Singh- CM पद का मैं भी दावेदार: Rahul Gandhi के नेतृत्व में लड़ेंगे चुनाव

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Punjab Congress में इतने चेहरे कि हर कोई मुख्यमंत्री बन सकता

Punjab Congress के नए प्रधान Pargat Singh ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक सुखपाल सिंह खैरा का नाम भी लिया।

Pargat Singh ने कहा कि Congress में इतने चेहरे हैं कि हर कोई मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

Pargat Singh  कल यानी रविवार (11 अक्टूबर) को Punjab Congress प्रधान के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। चंडीगढ़ में स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में उनके पदभार ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस कार्यक्रम में पार्टी के करीब 10 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है।

Pargat Singh की तीन बड़ी बातें…

 

Pargat Singh ने कहा कि चन्नी, राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखपाल सिंह खैरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के पास काफी अनुभव है। वह उनके अनुभव का लाभ उठाकर पार्टी को मजबूत करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।

Punjab Congress में गुटबाजी और आपसी मनमुटाव की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। हर नेता की भूमिका तय की जाएगी और सभी को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह ने कहा कि वह राजनीति में स्ट्राइकर की भूमिका निभाएंगे, लेकिन फुल बैक के तौर पर भी खेलने के लिए तैयार हैं।

सीएम पद पर Pargat Singh की दावेदारी के 4 कारण

  • प्रदेश प्रधान का पद: 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रधान नियुक्त किया है। राजनीतिक परंपराओं के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले प्रदेश प्रधान बनने वाला नेता स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो जाता है।
  • गुटबाजी खत्म करने के लिए ‘स्वीकार्य चेहरा’: पंजाब कांग्रेस लंबे समय से चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के गुटों के बीच खींचतान से जूझ रही थी। परगट सिंह की छवि एक साफ-सुथरे और विवादों से दूर रहने वाले नेता की है, जिन्हें सभी धड़े स्वीकार करते हैं। वह चन्नी और नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट दोनों के करीबी माने जाते हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।
  • संतुलित सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण: परगट सिंह जट्ट सिख समुदाय से आते हैं और दोआबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें कमान सौंपकर कांग्रेस ने बिना किसी बड़े सामाजिक बदलाव के समीकरणों को संतुलित किया है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  • तीन बार के विधायक रह चुके: वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह पंजाब के खेल और शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं और तीन बार के विधायक हैं। उनकी बेदाग और मुखर राजनीतिक शैली के कारण उन्हें एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है।
2 अक्टूबर को बने प्रदेश अध्यक्ष

Jalandhar Cantt से विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को 2 अक्टूबर 2026 को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली।

पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाओं के बीच Congress हाईकमान ने परगट सिंह पर भरोसा जताया। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में विजय इंदर सिंगला का नाम भी चर्चा में था, लेकिन हाईकमान ने परगट सिंह को संगठन की कमान सौंपी।

2027 से पहले गुटबाजी खत्म करना चुनौती
Punjab में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और सभी गुटों को एकजुट करने की चुनौती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं।
ऐसे में Pargat Singh के सामने सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। हॉकी के मैदान में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह के लिए राजनीतिक मैदान में भी टीम के सभी खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना अहम होगा। विरोधियों का कहना है कि उनके लिए यह राह आसान नहीं होगी।
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