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Punjab चुनाव से पहले सांसद Amritpal को बड़ी राहत:अमृतसर कोर्ट ने वीडियो कॉल करने की अनुमति दी

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पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को बड़ी राहत मिली है।

उन्हें अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल पर बात करने की अनुमति मिल गई है। अमृतसर की जिला कोर्ट ने उन्हें 10 मिनट तक दादी से बातचीत करने की इजाजत दी है।
अमृतपाल सिंह के वकीलों ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने यह आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अमृतपाल सिंह 7 अक्टूबर से अगले 5 दिनों के भीतर एक बार अपनी दादी से वीडियो कॉल पर बात कर सकेंगे।
अमृतपाल सिंह अप्रैल 2023 से असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। अप्रैल 2026 में NSA की अवधि खत्म होने के बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के आपराधिक मामले में जेल में ही औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से उन्हें डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है।
CM मान की सीट से चुनाव लड़ सकते हैं अमृतपाल
  • अमृतपाल के लिए 4 सीटों पर चर्चा: पार्टी सूत्रों के मुताबिक अमृतपाल सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए धूरी, खडूर साहिब, तलवंडी साबो और रामपुरा फूल सीटों पर विचार किया जा रहा है। इनमें धूरी से चुनाव लड़ने के लिए अमृतपाल भी इच्छुक हैं। धूरी पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में मुख्यमंत्री भगवंत मान की विधानसभा सीट है।
  • मालवा से चुनाव लड़ना अहम क्यों: इसकी बड़ी वजह मालवा में पंजाब की 117 में से 69 विधानसभा सीटे हैं। पंजाब में सरकार मालवा से ही बनती है। अभी अमृतपाल का ज्यादा आधार माझा एरिया में है। अगर वह मालवा से चुनाव लड़ते हैं तो फिर वहां भी अमृतपाल का प्रचार जोर पकड़ेगा। बड़े चेहरे से टक्कर लेने पर भी उन्हें चर्चा मिलेगी। इसके अलावा पार्टी का इस रीजन में भी जनाधार बढ़ेगा।
  • 2027 में ‘वारिस पंजाब दे’ की पहली चुनावी परीक्षा: पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के लिए काफी अहम है। पहली बार पार्टी चुनाव लड़ेगी और मौजूदा हालात के हिसाब से उनका CM चेहरा यानी सांसद अमृतपाल का भी पार्टी को प्रचार में साथ नहीं मिलेगा। हालांकि पार्टी ने अभी ये तय नहीं किया कि कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।
  • अकाली दल का विकल्प बनने की कोशिश: अमृतपाल की पार्टी की पूरी कोशिश पंजाब में अकाली दल का विकल्प बनने की है, ताकि पंथक वोट उनके साथ जुड़ सकें। अकाली दल की पिछली सरकार में बेअदबी और उससे जुड़े गोलीकांड की घटनाओं की वजह से पंथक वोट बैंक अकाली दल से खिसक गया था। यही वजह है कि 2024 के चुनाव में अमृतपाल को जेल में बंद होने के बावजूद पंथक वोट की ताकत ने चुनाव जिता दिया था।
क्यों जेल में बंद हैं अमृतपाल सिंह पढ़िए…
  • अजनाला थाने पर हमला: अमृतपाल सिंह के जेल जाने का मुख्य कारण 23 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुआ हिंसक हमला है। अमृतपाल ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और हिरासत में बंद अपने एक साथी को जबरन छुड़ा लिया, जिसमें छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद उनके खिलाफ हत्या के प्रयास , दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई थी।
  • गिरफ्तारी और शुरुआती NSA: पंजाब पुलिस के बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद 23 अप्रैल 2023 को उन्हें मोगा से गिरफ्तार किया गया। देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा मानते हुए सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से उन्हें असम की हाई-सिक्योरिटी डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
  • जेल मे रहते लोकसभा चुनाव जीता: जेल में बंद रहते हुए ही जून 2024 में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय चुनाव जीता। जुलाई 2024 में उन्हें सांसद पद की शपथ लेने के लिए कोर्ट से 4 दिनों की विशेष पैरोल मिली थी, जिसके बाद वे वापस डिब्रूगढ़ जेल भेज दिए गए।
  • अप्रैल 2026 में NSA की अवधि समाप्त: अमृतपाल सिंह पर लगा NSA (रासुका) अप्रैल 2026 में पूरी तरह समाप्त हो गया। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि वे उनके डिटेंशन को चौथी बार आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। कानूनन किसी भी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत बिना ट्रायल के एक निश्चित अवधि से ज्यादा नहीं रखा जा सकता, इसलिए उनका NSA हटा दिया गया।
  • री-अरेस्ट और न्यायिक हिरासत: जैसे ही अप्रैल 2026 में अमृतपाल का NSA हटा, पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के मुख्य आपराधिक मामले में जेल के भीतर ही फिर से औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशानुसार, सुरक्षा कारणों से उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है और मामले की आगे की कानूनी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही है।
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