कैप्टन ने अपने लेख में यह बात कही है कैप्टन ने अपने लेख में कहा है कि यह श्रेणी जायज असहमति से किस तरह अलग है।
15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सलवाद’ से बचने की बात कही थी। अब पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने लेख के जरिए पीएम से पूछ रहे हैं कि इस बात को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कैप्टन ने अपने लेख में यह बात कही है कैप्टन ने अपने लेख में कहा है कि यह श्रेणी जायज असहमति से किस तरह अलग है। नक्सल शब्द का इस्तेमाल हल्के तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक आजादी में से किसी एक को नहीं चुनना चाहिए। सही तरीके से समझा जाए तो दोनों एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।
प्रधानमंत्री ने नौजवानों के हालिया प्रदर्शनों को ‘दिमागी नक्सलवाद’ नहीं कहा, लेकिन सियासी शब्द कभी-कभी अपने असल संदर्भ तक सीमित नहीं रहते।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ करें कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का क्या अर्थ है और यह श्रेणी जायज असहमति से किस तरह अलग है।
यह कहा था पीएम मोदी ने अपने संबोधन में 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा था कि वर्षों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोग गलियारों में अपनी जगह बनाकर बैठे थे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के रूप में भी माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था।
उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे देशवासियों, जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को लगभग समाप्त कर दिया है। लेकिन हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। अहिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत रास्ते पर घसीटने के लिए वे भांति-भांति के तरीके तलाश रहे हैं। इन्हीं नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।”