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1 April से Russia किसी भी देश को पेट्रोल नहीं बेचेगा—इस बड़ी वजह से लिया गया फैसला

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Russia ने 1 अप्रैल से दूसरे देशों को अपना पेट्रोल बेचने पर रोक लगाने का बड़ा फैसला लिया है.

 इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इस स्थिति में रूस एक बार फिर भारत के लिए अहम सहयोगी बनकर उभर सकता है।
रूस से बढ़ेगा तेल और गैस आयात
मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने Russia से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई को लेकर भी सहमति बनी है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में देश की कुल ऊर्जा जरूरत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रूस से पूरा किया जाए।
रुपये-रूबल में होगा व्यापार
इस पूरी व्यवस्था की खास बात यह है कि भारत और रूस के बीच व्यापार रुपये और रूबल में किया जाएगा। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
अमेरिका की छूट का फायदा
पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए United States ने रूस और Iran से तेल और गैस आयात पर कुछ राहत दी है। भारत इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ भारत रूस से तेल और गैस आयात बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान से भी ऊर्जा खरीदने की संभावनाएं तलाश रहा है।
सरकार के अनुसार, रूस के साथ मजबूत रिश्तों से भारत को कूटनीतिक लाभ भी मिलेगा। रूस, ईरान का करीबी देश है, ऐसे में क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत के हितों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है। खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट से बचने में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा रूस के साथ व्यापार के लिए इस मार्ग पर निर्भरता भी कम है।
अब तक का आयात
यूक्रेन युद्ध के बाद से अब तक भारत रूस से करीब 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीद चुका है। अब लक्ष्य इसे और बढ़ाकर ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से पूरा करने का है।
ईरान को लेकर अलग रणनीति
भारत Iran के साथ भी नई परिस्थितियों में ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है। अगर ईरान से तेल और गैस आयात पर सहमति बनती है, तो इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि वह भारत के लिए समुद्री रास्तों पर कोई बाधा नहीं डालेगा। माना जा रहा है कि फिलहाल ईरान की रणनीति उन खाड़ी देशों पर दबाव बनाने की है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
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