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हारी हुई बाजी अपने पाले में ले आया Iran ! इन 5 दांव से पलट दिया America-Israel का वॉर गेम

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युद्ध के पहले और दूसरे दिन ईरान पर भारी बमबारी हुई.

28 फरवरी 2025 को जंग शुरू होते ही ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो गया. देखते ही देखते अमेरिकी और इजराइली वायुसेना ने ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को जमींदोज कर दिया. इसी दिन यानी 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी हत्या कर दी गई. उसके 40 टॉप कमांडर भी मारे गए. इनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी शामिल थे, लेकिन अब युद्ध के 15वें दिन ईरान का पलड़ा भारी दिख रहा है.
एक तरफ ताबड़तोड़ हवाई हमले करके भी अमेरिका ईरान में तख्तापलट नहीं कर पाया. वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान को बेदम करने के लिए दुश्मन देश चीन और अपने नाटो सहयोगियों से मदद मांग रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरान ने 15 दिनों में ऐसा क्या किया, जिससे अमेरिका जैसे सुपरपावर बैकफुट पर हैं…

ईरान ने कैसे पलटा पासा?

1. ईरान ने युद्ध को लंबा खिंचने का रास्ता चुना. इसके लिए सेना के भीतर शक्ति विभाजित किए गए. इसे मोजेक फॉर्मूला नाम दिया गया. इसके तहत सेना की सभी इकाई को स्वतंत्र रूप से फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया. इसका असर देखने को मिला. बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के तबाह होने के बावजूद अमेरिकी सहयोगियों पर ईरान का हमला जारी रहा. ईरान ने छोटे-छोटे ड्रोन से अरब देशों को निशाना बनाना शुरू किया. उसकी कोशिश जंग को लंबा खिंचने की है.
2. आर्थिक नाकेबंदी का प्लान तैयार किया. इसके तहत ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को घेर लिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने जैसे ही होर्मुज से जाने के लिए जहाजों को उकसाया, वैसे ही ईरान ने थाईलैंड के एक मालवाहक जहाज को रडार पर ले लिया. इसके बाद होर्मुज का पूरा रास्ता ब्लॉक हो गया. होर्मुज के नीचे ईरान ने बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं.
3. अमेरिकी हमलों की असलियत दिखाने के लिए ईरान ने अमेरिकी मीडिया सीएनएन को तेहरान में एंट्री दी. सीएनएन ने ट्रंप प्रशासन और सरकार के खिलाफ वहां से जो खूब रिपोर्ट की. इनमें ईरान के एक स्कूल में मरने वाली बच्चियों की रिपोर्ट भी शामिल थीं. सीएनएन ने सबूत के साथ बताया कि अमेरिकी हमले में ही मिनाब स्कूल के बच्चे मारे गए. इन बच्चों की संख्या 160 से ज्यादा बताया गया. पूरी दुनिया में ट्रंप सरकार की किरकिरी हुई.
4. ईरान के विदेश मंत्री रोज इंटरव्यू दे रहे हैं. वो भी अमेरिकी मीडिया को. ईरान की कोशिश इस लड़ाई को इजराइल वर्सेज ईरान बनाने की है. अब्बास इसी नीति का जिक्र करते हैं. अब्बास ने एक इंटरव्यू में कहा- अगर इजराइल के लिए अमेरिका अपने सैनिकों को मरवाना चाहता है, तो हम क्या ही कह सकते हैं? हम तो सिर्फ अपनी रक्षा कर रहे हैं. मैसेजिंग के जरिए ईरान मजबूत मोर्चेबंदी कर रहा है.
5. अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद अमेरिका और इजराइल को यह उम्मीद थी कि ईरान के आम नागरिक सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन यह नहीं हो पाया. इसी तरह अमेरिका ने ईरान को अस्त-व्यस्त करने के लिए कुर्द्स से संपर्क साधा, लेकिन ईरान ने उसके इस प्लान को भी फेल कर दिया. अब अमेरिका नाटो और चीन जैसे देशों से मदद मांग रहा हैं.
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