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CM post के दावेदारों को साधने में जुटी Congress, रेस में Hooda-Sailja और Surjewala शामिल; किसके सिर सजेगा ताज?

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हरियाणा विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत तय मान रही कांग्रेस अब एग्जिट पोल के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सूबे के दिग्गजों की तगड़ी प्रतिस्पर्धा से निपटने की तैयारियों में जुट गई है।

वहीं, मुख्यमंत्री पद के तीनों प्रमुख दावेदार भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला भी अपने-अपने समर्थकों को एकजुट रखते हुए रणनीति बना रहे हैं।

पर्यवेक्षकों को चंडीगढ़ भेजने की हो गई तैयारी

हुड्डा जहां सधे कदमों से दांव चल रहे हैं, वहीं कुमारी सैलजा ने रविवार को भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी जताने से कोई गुरेज नहीं किया। वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही इस रस्साकशी के चुनाव नतीजे आने के साथ ही और तेज होने को देखते हुए ही कांग्रेस हाईकमान ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों के चयन से लेकर उन्हें चंडीगढ़ भेजने की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की घोषणा तो मंगलवार को नतीजे आने के बाद ही की जाएगी। लेकिन, पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार इसकी तैयारियों में अभी से जुटे हुए हैं। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अजय माकन हरियाणा की चुनावी रणनीति का शीर्ष नेतृत्व की ओर से संचालन कर रहे हैं।

‘विधायक दल का नेता हाईकमान को चुनना चाहिए’

पुख्ता संकेत हैं कि बेशक केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भेजा जाएगा, मगर हाईकमान के रणनीतिकार के रूप में इन दोनों नेताओं की मुख्यमंत्री के चयन में अहम भूमिका रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सोमवार रात तक राजधानी दिल्ली लौट आएंगे।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी चुनाव नतीजों के दिन दिल्ली में ही रहेंगे। कांग्रेस में चुनाव परिणाम आने के बाद नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस अध्यक्ष को सीएम का नाम तय करने के लिए अधिकृत किया जाता है। हालांकि, इस दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षक सभी विधायकों से मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी पसंद पूछते हैं।

हाईकमान पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और विधायकों की बहुमत राय के अनुरूप मुख्यमंत्री का नाम तय करता है। दिलचस्प यह है कि हुड्डा को चुनौती दे रहीं कुमारी सैलजा ने रविवार को कहा कि केवल विधायकों की राय से ही सीएम नहीं चुना जाना चाहिए, क्योंकि इससे गुटबाजी को बढ़ावा मिल सकता है। हाईकमान को विधायक दल का नेता चुनना चाहिए।

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