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Rewari seat is zero: दिग्गजों के मुकाबले को आप के उम्मीदवार ने रोमांचक बनाया, निर्दलीय ने भी ठोक दी है ताल

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धारूहेड़ा जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र को दिल में बसाने वाले रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला कांटे का होने के साथ रोमांचक भी हो गया है। मुख्य मुकाबले में मानी जा रही दोनों बड़ी पार्टियों के प्रत्याशियों के सामने तीन तिगाड़ा खेल बिगाड़ा वाली स्थिति आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में सामने आ गई है। यह तीसरा प्रत्याशी किसका खेल बिगाड़ेगा, यह तो मतदाता के मन में है, लेकिन चुनाव प्रचार अंतिम दौर में पहुंचने के साथ आप का यह प्रत्याशी भी दौड़ में दिखने लगा है। यहां मुकाबले को रोचक एक निर्दलीय ने बना दिया है क्योंकि थोड़े-थोड़े वोट वह सबके झटकता दिख रहा है।

रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र ऐसा है जिसमें चार गांव और पांच किलोमीटर पर मतदाताओं का मिजाज बदला नजर आता है। इसका कारण है यहां 36 बिरादरी के अच्छे वोट होना और औद्योगिक इलाके में प्रवासियों की अच्छी बसावट। जब गुड़गांव से धारूहेड़ा की ओर आते हैं तो बड़ी औद्योगिक इकाइयां दिखाई देती हैं। यहां चाय के छोटे-छोटे स्टाल पर यूपी-बिहार के मूल निवासी फैक्टरी कर्मचारी मिलते हैं। यहीं मिले धारूहेड़ा में दस साल से रह रहे अशोक विश्वकर्मा का आकलन है कि अबकी हवा बदली है। उनके मुताबिक दो में एक-एक वोट की लड़ाई है। ऐसे में तीसरा बाजी मार सकता है। लेकिन, स्टाल पर मौजूद एक युवा कर्मचारी का कहना है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ा तो समझिए कि हवा बदल रही है।

शहर का मिजाज समझना मुश्किल

इस विधानसभा में रेवाड़ी एक ऐसा शहर है जिसका मिजाज समझना और मतदाताओं के मन को टटोलना मुश्किल काम है। यह शहर जितना ऐतिहासिक है, उतना है आधुनिकता के पंखों पर सवार होकर आगे बढ़ रहा है। यहां की चुनावी सियासत भी कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव और अब भाजपा की केंद्रीय सरकार में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। जिस गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र में रेवाड़ी विधानसभा सीट आती है, उसके पिछले कई वर्षों से सांसद राव इंद्रजीत सिंह ही हैं।
दूसरी ओर, रेवाड़ी सदर सीट से पिछली विधानसभा में विधायक चिरंजीव राव रहे हैं जो कैप्टन अजय यादव के बेटे हैं। इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस के चिंरजीव राव और भाजपा के लक्ष्मण यादव के बीच है। लक्ष्मण यादव राव इंद्रजीत के नजदीकी माने जाते हैं और कोसली से कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। इन दोनों के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं आम आदमी पार्टी के संदीप यादव, जो पिछले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय खड़े होकर अच्छे वोट हासिल कर चुके हैं। रेवाड़ी का युवा और बदलाव चाहने वाला वर्ग संदीप के साथ दिख रहा है।
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल भी संदीप यादव के पक्ष में रेवाड़ी शहर में रैली कर चुके हैं। एक पार्टी के रैली में मिले कारोबारी विक्की समझाते हैं कि इस शहर की खासियत यह है कि लोग पढ़े-लिखे और जागरूक मतदाता हैं। वह चुनावी परिदृश्य पर खुलकर बात करते हैं। अपनी राय बनाने से पहले वे सबको देख-सुन लेना चाह रहे हैं। इसीलिए जो शख्स भाजपा के नेता की रैली में उचक-उचककर सुनता मिला, वही केजरीवाल की रैली के बाहर भी दिखा। होटल कारोबारी राहुल कहते हैं कि यहां जीत का अंतर बहुत ज्यादा इसीलिए नहीं होता क्योंकि युवा मतदाता भी सोच विचार कर वोट देता है। उनके मुताबिक इस बार भी हार-जीत 1000 वोट के अंदर रहेगी।

चुनावी इतिहास में विरोध और विद्रोह शामिल

यहां का चुनावी इतिहास विरोध और विद्रोह से भरा है जिसमें उलटफेर खूब हुए हैं। चिरंजीव राव 2019 के चुनाव में भी अपने पिता कैप्टन अजय यादव की सीट वापस कांग्रेस में लाने में तो कामयाब रहे थे, लेकिन प्रतिद्वंद्वी भाजपा के सुनील मूसेपुर से महज 1317 वोट आगे रहे थे। तब भाजपा के बागी और निर्दलीय रणधीर कापड़ीवास ने काफी वोट काटे थे, जिससे भाजपा के हाथ से बाजी निकल गई थी। इससे पहले 2014 के चुनाव में लगातार छह जीत के बाद कैप्टन अजय यादव भाजपा के रणधीर सिंह कापड़ीवास से करीब 50,000 वोट से पीछे रहकर तीसरे स्थान पर खिसक गए थे। तब नंबर दो पर इनेलो से लड़े सतीश यादव रहे थे। इससे पहले के छह विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव चुनाव जीतते रहे थे।
समझने वाले बात यह है कि इस बार कैप्टन की जगह उनके पुत्र चिरंजीव यादव मैदान में हैं तो उनके मुकाबले कोसली के निवर्तमान विधायक लक्ष्मण सिंह यादव हैं। उन्हें चुनावी जीत का मास्टर माना जाता है और इस सीट पर सबसे ज्यादा वोट वाले यादव समाज में अच्छी पकड़ है। खुद राव इंद्रजीत उनकी जीत के लिए जोर लगाए हुए हैं। लेकिन, मुकाबले को रोचक बना दिया है बार एसोसिएशन के छह बार प्रधान रहे सतीश यादव ने।

उनके पास खुद के 20000 से 30000 हजार के बीच वोट बताए जा रहे हैं। साथ ही दिल्ली से नजदीक होने के कारण यहां कुछ वोट आप का भी है जो संदीप यादव को मिल जाएगा। इस तरह उन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। निर्दलीय प्रत्याशी प्रशांत सन्नी भी अच्छा समर्थन जुटाते दिख रहे हैं। भाजपा को छोड़कर सन्नी ने चुनावी मैदान में जिस मजबूती से ताल टोकी है, वह कई प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकता है।

वोट का गणित भी सबसे अलगरेवाड़ी विधानसभा सीट में 2.53 लाख मतदाता हैं। इसमें करीब 84000 (33%) अहीर वोट हैं। एससी मतदाता 50000 (21) से अधिक, 21000 पंजाबी (8.5) और सैनी मतदाता 15000 (6) हैं। जाट, महाजन, कुंभकार और गुर्जर मतदाता भी 4 फीसदी से ज्यादा हैं। इसीलिए रेवाड़ी सीट को 36 बिरादरी वाला क्षेत्र कहा जाता है। इसमें प्रवासियों की संख्या भी ठीकठाक है।
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