Home Latest News होर्मुज का भाव होगा कम! किस प्लान पर काम कर रहे हैं...

होर्मुज का भाव होगा कम! किस प्लान पर काम कर रहे हैं खाड़ी देश?

28
0
Google search engine

ईरान अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के चलते होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली तेल की सप्लाई में लगातार रुकावटें आ रही हैं.

अमेरिकी और ईरान के बीच जारी जंग और होर्मुज स्ट्रेट में उर्जा सप्लाई की रुकावटों के बीच गल्फ यानी खाड़ी के देश अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. खाड़ी देश अब होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर हुए बिना ज्यादा से ज्यादा तेल सप्लाई की योजनाओं पर काम कर रहे हैं. इसका साफ मकसद है दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक पर निर्भरता कम करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर तेहरान के असर को सीमित करना. अमेरिका और ईरान के बीच जंग से पहले दुनिया का तकरीबन 5वां हिस्सा तेल इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता था.

नई पाइपलाइनें बन रही हैं

ईरान ने होर्मुज का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना की घोषणा पहले ही कर दी है. इससे उसे अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है. ईरान पर सुरक्षित रास्ते के लिए तेल टैंकरों से लाखों डॉलर की मांग करने का आरोप भी लगा है. फिलहाल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक ने पहले ही बड़ी पाइपलाइन परियोजनाएं शुरू कर दी हैं. यह होर्मुज के बजाय दूसरे रास्तों से तेल ले जाएंगी.

UAE योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है

गोल्डमैन सैक्स की विश्लेषक ईकाई एलेक्जेंड्रा पॉलस के मुताबिक 2027 के अंत तक इतनी पाइपलाइन क्षमता तैयार हो सकती है. UAE की वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन परियोजना अब लगभग आधी पूरी हो चुकी है. क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायेद ने अधिकारियों को 2027 तक परियोजना पूरी करने का निर्देश दिया है. एक बार चालू होने के बाद, 252 मील लंबी यह पाइपलाइन मौजूदा फुजैराह पाइपलाइन के साथ-साथ चलेगी और UAE की ज़मीन के रास्ते तेल निर्यात करने की क्षमता को दोगुना करके 3.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर देगी.
अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि हालिया घटनाओं ने देश की दीर्घकालिक रणनीति को और मज़बूत किया है. उन्होंने कहा अभी भी दुनिया की बहुत ज़्यादा ऊर्जा बहुत कम चोक पॉइंट्स यानी संकरे रास्तों से होकर गुज़रती है. ठइसी वजह से UAE ने एक दशक से भी पहले ऐसा बुनियादी ढांचा बनाने का फ़ैसला किया था जो होर्मुज होर्मुज स्ट्रेट से ना गुजरे.
UAE होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के अरब सागर वाले हिस्से में एक बड़े नए पोर्ट और कंटेनर टर्मिनल की योजना भी बना रहा है. यह इस क्षेत्र में आने वाले सामान के लिए एक और रास्ता देगी, जिसमें स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा. यह भविष्य में दुबई के जेबेल अली पोर्ट को टक्कर दे सकती है.

ईराक भी 435 मील लंबी पाइपलाइन पर कर रहा काम

इसके अलावा ईराक ने 435 मील लंबी बसरा-हदीथा पाइपलाइन पर काम शुरू कर दिया है, जो आगे चलकर जॉर्डन, सीरिया और तुर्की से जुड़ेगी. इस प्रोजेक्ट से हर दिन 25 लाख (2.5 मिलियन) बैरल तेल के ट्रांसपोर्ट की उम्मीद है. इसके निर्माण का बजट 1.5 अरब डॉलर रखा गया है.

सऊदी अरब भी अपनी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाना चाहता है

सऊदी अरब भी रेड सी (लाल सागर) तक जाने वाली अपनी कच्चे तेल की पाइपलाइन की क्षमता को बढ़ाकर 90 लाख (9 मिलियन) बैरल प्रतिदिन करने की योजनाओं पर विचार कर रहा है. इस पर अभी शुरुआती बातचीत ही चल रही है.

क्या है खाड़ी देशों का लक्ष्य

खाड़ी देशों का इन सभी कवायदों का लक्ष्य है कि खाड़ी से होने वाले युद्ध-पूर्व तेल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इस जलडमरूमध्य के बजाय दूसरे रास्तों से भेजा जा सके. 2028 के अंत तक, हर दिन 7.3 मिलियन बैरल तक तेल वैकल्पिक मार्गों से बह सकता है, जिससे खाड़ी से होने वाला लगभग 60 प्रतिशत तेल निर्यात के लिए होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं होगी.

फिर भी होर्मुज स्ट्रेट पर बनी रहेगी निर्भरता?

विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देश अगर अपनी योजनाओं पर काम कर भी लेते हैं तो भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व बना रहेगा. हर दिन लगभग 70 से 90 लाख (7 से 9 मिलियन) बैरल तेल और रिफाइंड उत्पादों का ट्रांसपोर्ट अभी भी इसी जलमार्ग पर निर्भर रहेगा. कुछ नए एक्सपोर्ट रूट रेड सी में स्थिरता पर भी निर्भर करते हैं.
यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने हाल ही में बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास हमले की धमकी दी है. इसका मतलब है कि भले ही खाड़ी देश क्षेत्रीय तेल एक्सपोर्ट पर ईरान के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन वे इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाएंगे.
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here