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ईरान और अमेरिका के बीच डील तय, लेकिन इस्लामाबाद में नहीं होगी बैठक! जानिए 2 कारण

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इस्लामाबाद में बैठक पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर 3 बिंदुओं पर सहमति बन गई है, जिसके बाद दोनों पक्ष एक पेज का समझौता प्रस्ताव जारी करने की तैयारी में है. ईरान से फाइनल जवाब आने के बाद इसको लेकर दोनों देश के डेलिगेशन आमने-सामने की बैठक करेंगे. इस बार बैठक इस्लामाबाद की जगह जिनेवा में हो सकती है. इसके 2 संकेत भी मिले हैं.
दरअसल, ईरान की कोशिश इस्लामाबाद की जगह जिनेवा में बैठक करने की है. जंग से पहले भी समझौते को लेकर जिनेवा में ही बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उससे पहले ही अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया था.

इस्लामाबाद में बैठक क्यों नहीं, 2 संकेत

1. एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बैठक का स्थान तय नहीं हुआ है. जिनेवा को लेकर बातचीत चल रही है. जिनेवा में शांति स्थापित करने के लिए पहले भी कई समझौते हुए हैं. मसलन, फ्रांस-वियतनाम के समझौते, सोवियत-अफगानिस्तान के समझौते. जिनेवा संधि के तहत ही दुनियाभर के युद्ध में घायल सैनिकों के साथ मानवीय व्यवहार करना अनिवार्य है.
2. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्टर डूनबोर्स ने समझौते को लेकर खबर आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बात की. ट्रंप ने उन्हें कहा कि समझौता करीब-करीब फाइनल है, लेकिन तुम इस्लामाबाद नहीं चले जाना. क्योंकि, अभी कुछ भी तय नहीं है. डूनबोर्स का कहना है कि ईरान भी समझौते को लेकर सहमत है.

ईरान और अमेरिका में किन मुद्दों पर बनी सहमति

एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट की है. इसके मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच 3 मुद्दों पर सहमति बन गई है. पहला मुद्दा है- परमाणु हथियारों को नहीं बनाने का संकल्प. यानी ईरान यह तय करेगा कि वो परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम संवर्धन नहीं करेगा. इसके अलावा उसके पास जो संवर्धित यूरेनियम है, उसे या तो पतला करेगा या खत्म करेगा.
दोनों के बीच दूसरी सहमति होर्मुज को लेकर बनी है. ईरान और अमेरिका होर्मुज से अपना ब्लॉकेड समाप्त करेगा. अभी होर्मुज को ईरान तो होर्मुज के बाहर अमेरिका ने नाकाबंदी कर रखा है.
अमेरिका और ईरान में तीसरी सहमति आर्थिक प्रतिबंध हटाने को लेकर बनी है. अमेरिका ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध खत्म करेगा. इसके अलावा जो उसके फ्रीज पैसे हैं, वो भी वापस लौटाएगा. ईरान को कम से कम इस प्रोसेस के जरिए 150 अरब डॉलर से ज्यादा पैसे मिलने की उम्मीद है.
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