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संसद की चाय पार्टी में PM Modi के साथ Priyanka Gandhi की मौजूदगी पर क्यों उठे सवाल?

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संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने टी पार्टी बुलाई थी.

संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी, जो सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बन गई. ये फोटो निकली लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला की ओर से बुलाई गई टी पार्टी में से. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी बातचीत करते दिखे थे. हालांकि इस पार्टी में प्रियंका का शामिल होना सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास को रास नहीं आया. उन्होंने प्रियंका पर निशाना साधा है. ब्रिटास ने कहा, संसद में मनरेगा को खत्म किए जाने के घंटों बाद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने एक आम चाय पार्टी में शामिल होना चुना.
उन्होंने कम से कम चार ऐसे उदाहरण बताए जब विपक्ष ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ऐसी बैठकों का बहिष्कार किया, जिसमें पिछले साल का शीतकालीन सत्र भी शामिल है. ब्रिटास ने मनरेगा का जिक्र करते हुए कहा, महात्मा गांधी की दूसरी बार हत्या के बाद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की तारीफ करके और एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधकर वे भारत के गरीबों को क्या संदेश दे रहे हैं. विपक्ष ने सरकार की आलोचना की कि उसने न सिर्फ मनरेगा को खत्म किया, बल्कि इसके ढांचे को भी उलट दिया और साथ ही महात्मा गांधी शब्द को भी हटा दिया.
ब्रिटास ने कहा कि ऐसे नजारे से कांग्रेस नेता भी असहज थे. उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि प्रियंका गांधी का कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी के स्ट्रक्चर में कोई औपचारिक पद नहीं है. जो दूसरे लोग पदों पर हैं वे मौजूद नहीं थे.

क्यों उठे सवाल?

टी पार्टी में प्रियंका के पहुंचने पर इस वजह से सवाल उठ रहे हैं क्योंकि मनरेगा का नाम बदलने पर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर रही है. सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है. राहुल ने कहा कि रोजागार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए विकसित भारत गारंटी बिल मनरेगा का रीवैम्प नहीं है, बल्कि इसके मूल सिद्धांतों को कमजोर करना है. उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस साल खत्म कर दिए.
राहुल गांधी ने कहा कि हमने देखा कि कोविड के दौरान मनरेगा का क्या मतलब था. जब अर्थव्यवस्था बंद हो गई और लोगों की रोजी-रोटी खत्म हो गई, तो इसने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज में डूबने से बचाया. इसने साल-दर-साल महिलाओं की सबसे ज़्यादा मदद की. उन्होंने बिल पास होने के तरीके की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि इसे बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए संसद में पास करवा दिया गया. राहुल गांधी ने कहा कि ग्रामीण लोगों की रोजी-रोटी पर इसके दूरगामी असर के बावजूद, बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया गया.

सोनिया बोलीं- सरकार ने चलाया बुलडोजर

वहीं सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया. न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया गया बल्कि मनरेगा का रूप-स्वरुप बिना विचार-विमर्श किए, बिना किसी से सलाह-मशवरा किए, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए मनमाने ढंग से बदल दिया गया. अब किसको, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, यह जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी.
यही नहीं मनरेगा से गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष ने मार्च भी निकाला था. संसद में गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक ये मार्च निकाला गया था. सोनिया गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. वीबी- जी राम जी बिल जब लोकसभा में पास हो रहा था तब विपक्ष ने बिल के कागज फाड़कर फेंक दिए थे.
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