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भीख मांगते 18 बच्चों का रैस्क्यू, DNA जांच से खुलेगा इनकी पहचान का राज

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भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की पहचान व उनकी असली पारिवारिक स्थिति की जांच के लिए प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की पहचान व उनकी असली पारिवारिक स्थिति की जांच के लिए प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। हाल ही में जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा विभाग ने घोषणा की थी कि सड़कों पर घूमते और भीख मांगते पाए गए बच्चों को रैस्क्यू कर उनका डीएनए टैस्ट कराया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वे अपने असली माता-पिता के साथ हैं या किसी प्रकार के शोषण या तस्करी के शिकार हुए हैं। इसी क्र म में रविवार को जिला स्तरीय समिति व पुलिस बल ने शहर के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और चौड़ा बाजार में विशेष अभियान चलाया।
इस दौरान 18 बच्चों को रैस्क्यू कर सुरक्षित हिरासत में लिया गया। बच्चों के साथ मौजूद वयस्कों की पहचान की जांच की गई और आधार कार्ड से उनकी जानकारी लेकर सूची तैयार की गई। अधिकारियों को संदेह है कि इनमें से कई बच्चे अपहरण या मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं और उन्हें लुधियाना लाकर जबरन भीख मंगवाने का कार्य करवाया जा रहा है। ऐसे मामलों की पुष्टि के लिए अब डीएनए परीक्षण को एक सशक्त माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर द्वारा पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि यदि कोई बच्चा किसी वयस्क के साथ संदिग्ध अवस्था में पाया जाता है तो डीएनए रिपोर्ट आने तक बच्चे को बाल कल्याण समिति की देखरेख में बाल देखभाल संस्थान में रखा जाएगा। यह अभियान जीवन ज्योत-2 परियोजना के तहत चलाया जा रहा है, जिसका मकसद सड़कों पर घूम रहे, बेसहारा या जबरन भीख मंगवाए जा रहे बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना है। पुलिस और सामाजिक सुरक्षा विभाग मिलकर आगे भी ऐसे रैस्क्यू ऑप्रेशन जारी रखेंगे। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि यदि वे किसी बच्चे को संदिग्ध स्थिति में देखें तो तुरंत चाइल्डलाइन नंबर 1098 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।
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