चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में टीम इंडिया की जीत में हेड कोच गौतम गंभीर का एक फैसला टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
गौतम गंभीर ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली थी. गंभीर के कोच बनने के बाद टीम इंडिया के कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. भारतीय खिलाड़ी एक अलग माइंडसेट के साथ एग्रेसिव क्रिकेट खेल रहे हैं, जिसका फायदा भी मिला है.
गंभीर के कार्यकाल में ये टीम इंडिया का पहला आईसीसी इवेंट था और वह खिताब जीतने में कामयाब भी रहे. इस ऐतिहासिक जीत में गंभीर के एक फैसले का बड़ा योगदान रहा, जिसने टीम इंडिया की एक बड़ी कमी को दूर कर दिया.
Gautam Gambhir के एक फैसले से मिला नया ‘Dhoni’
गौतम गंभीर ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से पहले भारतीय टीम के बैटिंग ऑर्डर में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया था. अक्षर पटेल को 5वें नंबर पर खेलने की जिम्मेदारी दी गई. वहीं, केएल राहुल को छठे नंबर पर खिलाया गया.
गंभीर का ये दांव बिल्कुल सही साबित हुआ और केएल राहुल इस टूर्नामेंट में एक बड़े मैच फिनिशर बनकर उभरे. उन्होंने अपनी बेहतरीन फिनिशिंग स्किल्स से टीम इंडिया को कई महत्वपूर्ण मैचों में जीत दिलाई और साबित किया कि वह किसी भी दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं.
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में केएल राहुल ने अपनी फिनिशिंग स्किल्स से हर किसी को एमएस धोनी की याद दिला थी. एमएस धोनी आत्मविश्वास, शांत स्वभाव और परिस्थितियों को समझकर खेलने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने टीम इंडिया के लिए कई मुकाबले फिनिश किए थे.
धोनी हमेशा मुकाबले को आखिरी तक लेकर जाते थे और फिर मैच खत्म करके ही पवेलियन लौटते थे. केएल राहुल ने भी इस बार कुछ ऐसा ही किया और अपनी ठोस बल्लेबाजी से भारतीय टीम को मुश्किल से बाहर निकालते हुए जीत दिलाई. राहुल ने न केवल रन बनाए, बल्कि जब टीम दबाव में थी, तब उन्होंने मैच को अपनी तरफ मोड़ा और मैच खत्म किया.
राहुल ने 140 की औसत से बनाए रन
केएल राहुल ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में कुल 5 मुकाबले खेले, इस दौरान उन्हें 4 मैचों में बल्लेबाजी का मौका मिला. राहुल ने इन 4 मैचों में 140.00 की औसत से 140 रन बनाए, इस दौरान वह 3 बार मैच खत्म करके नाबाद लौटे.
उन्होंने टूर्नामेंट के पहले ही मैच में बांग्लादेश के खिलाफ रन चेज के दौरान 47 गेंदों पर नाबाद 41 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई. इसके बाद, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी टारगेट का पीछा करते हुए 34 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए. इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने दबाव में एक मैच विनिंग पारी खेली. उन्होंने 33 गेंदों पर नाबाद 34 रन बनाए और टीम को खिताब तक पहुंचाया.