1 अप्रैल से कुछ बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे।
1 अप्रैल से कुछ बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे। इन बदलावों में टैक्स से लेकर कस्टम ड्यूटी तक कई अहम बदलाव हैं। आइए, इन्हें आसान शब्दों में समझते हैं ।
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TAX स्लैब में बदलाव
नए टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब 12 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा, 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी जोड़ा गया है, जिससे इस लिमिट को बढ़ाकर 12.75 लाख कर दिया गया है। मतलब, अगर आपकी कमाई 12.75 लाख तक है, तो आपको टैक्स नहीं देना होगा।
नया टैक्स स्लैब:
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12 लाख तक – कोई टैक्स नहीं
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20 से 24 लाख की इनकम पर 25% टैक्स (पहले यह सीमा 15 लाख थी, अब बढ़कर 24 लाख हो गई है)
इस बदलाव से मिडिल और अपर-मिडिल क्लास को टैक्स में राहत मिलने वाली है।
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TDS लिमिट की सीमा बढ़ी
TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) की सीमा में भी बदलाव किया गया है।
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अब रेंट से होने वाली इनकम पर TDS की लिमिट 2.4 लाख से बढ़कर 6 लाख हो गई है। इसका मतलब है कि अगर आप 6 लाख तक का किराया लेते हैं, तो कोई टैक्स नहीं कटेगा।
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सीनियर सिटिजन्स के लिए बैंक FD से ब्याज पर TDS लिमिट 50,000 से बढ़कर 1 लाख हो गई है।
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प्रोफेशनल सर्विसेज़ पर TDS लिमिट 30,000 से बढ़कर 50,000 हो गई है।
इन बदलावों से छोटे कमाई वालों को राहत मिलेगी, क्योंकि उनकी कैश फ्लो बेहतर होगी।
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TCS लिमिट की सीमा बढ़ी
TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। अब, अगर आप अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए पैसे भेजते हैं, तो 7 लाख की बजाय 10 लाख तक की राशि पर कोई TCS नहीं लगेगा। पहले 0.5% से 5% तक TCS कटता था, लेकिन अब 10 लाख तक पूरी राशि बिना कटौती के सीधे पहुंच जाएगी।
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यूलिप पर कैपिटल गेन टैक्स
यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) पर भी नया टैक्स नियम लागू हुआ है।
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अब, अगर आपका सालाना प्रीमियम 2.5 लाख से ज्यादा है, तो उसे कैपिटल एसेट माना जाएगा और जब आप इसे भुनाएंगे, तो उस पर टैक्स लगेगा।
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अगर आपने 12 महीने से ज्यादा इसे रखा तो 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स और कम रखने पर 20% शॉर्ट टर्म टैक्स लगेगा।
इससे सरकार का उद्देश्य यह है कि लोग यूलिप को टैक्स-फ्री निवेश के तौर पर इस्तेमाल न करें।
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अधिक समय के लिए अपडेटेड टैक्स रिटर्न
अब, अगर आप अपना टैक्स रिटर्न अपडेट करना चाहते हैं तो आपको 24 महीने की बजाय 48 महीने तक का समय मिलेगा। हालांकि, अगर आप 24 से 36 महीने के बीच रिटर्न अपडेट करते हैं, तो 60% एक्स्ट्रा टैक्स देना होगा और 36 से 48 महीने के बीच 70% एक्स्ट्रा टैक्स लगेगा। इस बदलाव से आपको अपनी गलतियों को सुधारने का ज्यादा समय मिलेगा।
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कस्टम ड्यूटी में बदलाव
कस्टम ड्यूटी में भी कुछ उत्पादों पर असर पड़ेगा:
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सस्ते सामान: महंगी कारें, लाइफ-सेविंग दवाएं, और EV बैटरी पार्ट्स सस्ते हो सकते हैं।
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महंगे सामान: स्मार्ट मीटर, इम्पोर्टेड जूते, और LED टीवी महंगे हो सकते हैं।
यह बदलाव आपकी शॉपिंग पर असर डाल सकते हैं, तो ध्यान रखें कि कुछ चीज़ें सस्ती और कुछ महंगी हो सकती हैं।
इन बदलावों से आपको टैक्स में राहत मिलेगी, लेकिन कुछ सामान महंगे भी हो सकते हैं। वहीं, यूलिप जैसे निवेश उत्पाद पर टैक्स का असर पड़ेगा। ध्यान रखें कि इन बदलावों का फायदा 1 अप्रैल से शुरू होगा, लेकिन कुछ फैसलों को लागू करने में समय लग सकता है, जैसे सड़कें और रेल योजनाएं।