मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है।
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान का विशेष महत्व है। लेकिन अगर ऐसा करना असंभव है तो घर पर ही नहाने वाले पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से भी गंगा स्नान जितना फल की प्राप्ति होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान करने से व्यक्ति के धन-धान्य में कभी नहीं होती है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन उड़द की दाल और चावल का दान किया जाता है। साथ ही तिल, चिड़वा, सोना, ऊनी वस्त्र, कंबल आदि दान करने का भी महत्व है। बता दें कि इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति 2025 स्नान-दान मुहूर्त
मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 9 बजकर 3 मिनट से शुरू होगा जबकि समाप्त शाम 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। मकर संक्रांति का महापुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 9 बजकर 3 मिनट से सुबह 10 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। वहीं 14 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। अमृत काल का शुभ मुहूर्त सुबह में 7 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान के लिए पूरा दिन शुभ और अति उत्तम माना जाता है।
मकर संक्रांति
बता दें कि मकर संक्रांति को उत्तरायण, खिचड़ी, पोंगल और बिहू के नाम से भी जाना जाता है। पूरे देश में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है और इस दिन घर-घर में खिचड़ी बनाई जाती है। वहीं बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। मकर संक्रांति के दिन तिल जरूर खाना चाहिए।